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Thursday, 8 November 2012

अजनबी बनके आया थे, तेरे शहर में............

वक़्त को मैंने, मजबूर होते देखा !

अपनों को अपनों से दूर होते देखा !!

जिनका नाता नही था, ख्वाबो से कभी !

उन्ही को ख्वाबो में, चूर होते देखा !!

आँख जिनसे, मिलाने से डरते थे कभी !

उन्ही को आँखों में डूबता देखा !!

और जो हँसते थे, कभी इश्क की बातो पर !

उन्ही पर , मोह्हबत का सुरूर देखा !!

अजनबी बनके आया थे, तेरे शहर में !

अपने आप, को मैंने मशहुर होते देखा !!

पी के ''तनहा''

3 comments:

  1. वाह सुन्दर रचना ....

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  2. Thanks a lot yashoda ji and gupta ji

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पी के ''तनहा''