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Saturday, 29 March 2014

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी.......

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी !
पीड अपनी थी, अपनी जुबानी लिखी !!

उसकी यादों के सिवा, था ना कुछ भी बचा !
मैंने फिर भी, वो उसकी निशानी लिखी !!

घूंट अश्क़ो का मैं भी, अब पीने लगा हूँ !
गम के आशियाने में, अब यूँ जीने लगा हूँ !!

कुछ यादें जो उसकी, आयी आज लौटकर !
मैंने दास्ताँ वो उसकी, फिर पुरानी लिखी !!


पी के ''तनहा''

4 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मैं भी नेता बन जाऊं - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. बहुत भावपूर्ण और सुन्दर...

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पी के ''तनहा''