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Monday, 13 January 2014

तेरी यादो का, शुक्रियादा कैसे करूँ ,बड़ा साथ देती है ये मेरा, मुझे रुलाने में ..


तुझसे ही वजूद है मेरा, इस जमाने में !
कभी चुपके से आओ मेरे आशियाने में !!

मैं इंतज़ार करता हूँ तेरा, हर पल, हर घडी !
शायद तुम्हे मजा आता है, यूँ सताने में !!

ये इमारती खुसबू, फीकी पड़ जाएँगी तुम्हारी !
दो वक़्त गर बिताओ, मेरे गरीबखाने में !!

मैं, तेरी यादो का, शुक्रिया अदा कैसे करूँ !
बड़ा साथ देती है ये मेरा, मुझे रुलाने में !!

इन अश्क़ो का क्या है, निकल आते है कहीं भी !
और ही मजा है लेकिन, तेरे लिए अश्क़ बहाने में !!

वो गुजरे पल संजो कर रखे है, मैंने आज भी !
जिनका योगदान रहा था, कभी मुझको हसाने में !!

पी के ''तनहा''
मौलिक एवं अप्रकाशित रचना।



11 comments:

  1. आपकी लिखी रचना बुधवार 15/01/2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मकर संक्रांति की हार्दिक मंगलकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बढ़िया ग़ज़ल...बधाई!!

    अनु

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  4. सुंदर प्रस्तुति के लिये आभार आपका....

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  5. मैं, तेरी यादो का, शुक्रिया अदा कैसे करूँ !
    बड़ा साथ देती है ये मेरा, मुझे रुलाने में !!

    इन अश्क़ो का क्या है, निकल आते है कहीं भी !
    और ही मजा है लेकिन, तेरे लिए अश्क़ बहाने में !!
    सुन्दर अशआर

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  6. मैं, तेरी यादो का, शुक्रिया अदा कैसे करूँ !
    बड़ा साथ देती है ये मेरा, मुझे रुलाने में !!

    इन अश्क़ो का क्या है, निकल आते है कहीं भी !
    और ही मजा है लेकिन, तेरे लिए अश्क़ बहाने में !!
    सुन्दर अशआर

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पी के ''तनहा''