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Saturday, 28 April 2012

याद में तेरी हम , आज फिर से रो लिए

उड़ चुकी थी नीद , और जागकर हम सो लिए !,
याद में तेरी हम , आज फिर से रो लिए !! 
 
था तन्हाई का तूफ़ान......
थी आंसुओ की बारिश .........
चेहरा तो हमने अपने ......
उन आंसुओ से धो लिए .......
 
उड़ चुकी थी नीद , और जागकर हम सो लिए !,
याद में तेरी हम , आज फिर से रो लिए !! 
 
एक इंतज़ार में तेरे ....
कब से खड़े थे दर पे ....
तू वफा कर, या बेवफाई ...
हम तो तेरे हो लिए ....
 
उड़ चुकी थी नीद , और जागकर हम सो लिए !,
याद में तेरी हम , आज फिर से रो लिए !! 
 

4 comments:

  1. कल 01/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. वाह ...बहुत खूब ।

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आपके सुझाव और प्रतिक्रियाएं सादर आमंत्रित है ! आपकी आलोचना की हमे आवश्यकता है,
आपका अपना
पी के ''तनहा''