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Tuesday, 20 December 2011

कुछ मजबुरिया थी वक़्त की ,और कुछ मैं मजबूर था

दिल जिसके लिए  कबसे बेकरार था !
 खवाबो में भी अब उन्ही का इंतजार था !!
कुछ नींद थी इन आँखों में , सोचा चलो सोया जाये !
पलके बंद ही की थी , और ख्वाबो  में वो चले आये !!
मुझे यकीं नही था ,ख्वाबो में ही सही वो सामने है !
खुश था मैं इस तरह ,जैसे भक्त को दर्शन दिए भगवान ने है !!
कहने लगे वो, क्यों  मुझसे इतना प्यार किया तुमने !
गर मुझसे थी मोहब्बत ,क्यों नही इज़हार किया तुमने !!
दिल में तो बहुत कुछ था , बस इतना ही कह पाया !
बस तेरे दीदार को तरसते है , मैं और मेरा साया !!
यूँ तो प्यार का तेरे मुझ पर ,चढ़ा सुरूर था !
कुछ मजबुरिया थी वक़्त की ,और कुछ मैं मजबूर था !!
हर मुस्किल में ,तुने क्यों इतना साथ दिया मेरा !
शब्द नहीं है कहने को ,चुकाऊ कैसे एहसान तेरा !!
दोनों ही की आँखों से अश्क जब बहने लगे !
पोछ कर आंसू मेरे ,इस कद्र कहने लगे !!
सुख - दुःख में दोनों , हमसफ़र बन साथ चलेंगे !
डगर एक होगी , देखेगा ये ज़माना ,हाथो में लेकर हाथ चलेंगे !!
और फिर ख्वाबो की दुनिया में ऐसा तूफा आया !
सुबह हो गयी है ,कहकर किसी ने मुझे जगाया !!
दोस्तों ये कविता नहीं थी , सच्ची थी ये कहानी !
लिखते लिखते जिसको , आँखों में आ गया पानी !!

2 comments:

  1. बहूत हि सारगर्भित रचना है.

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पी के ''तनहा''