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Friday, 2 December 2011

मैं क्या करू अब मुझसे, ये दर्द सहा नहीं जाता.......

मैं क्या करू अब मुझसे 
ये दर्द सहा नहीं जाता ..........

दो पल गुजरे उसकी बाहों में 
काश  की ऐसा हो पाता

मैं क्या करू अब मुझसे 
ये दर्द सहा नहीं जाता ..........

तनहा तनहा वो यादों में रहता है 
अच्छा होता , दीदार जो उसका हो जाता 

मैं क्या करू अब मुझसे 
ये दर्द सहा नहीं जाता .............

समझ जो पाती तुम मुझको 
तो प्यार तुम्हे भी हो जाता 

मैं क्या करू अब मुझसे 
ये दर्द सहा नहीं जाता .........

अब इस रुसवाई का मैं क्या करू 
अच्छा होता , मुझको भी साथ तू अपने ले जाता 

मैं क्या करू अब मुझसे 
ये दर्द सहा नहीं जाता........ 

11 comments:

  1. वाह बहुत खूब दर्द को भी जैसे जुबान मिल गई |
    सुन्दर अहसास |

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  2. समझ जो पाती तुम मुझको
    तो प्यार तुम्हे भी हो जाता

    सुन्दर पंक्तियाँ..
    www.belovedlife-santosh.blogspot.com

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  3. आपकी सुन्दर रचना पढ़ी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , शुभकामनाएं.

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  4. मैं क्या करू अब मुझसे
    ये दर्द सहा नहीं जाता .............
    समझ जो पाती तुम मुझको
    तो प्यार तुम्हे भी हो जाता
    very nice and heart touching poem...

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  5. कल 06/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. बहुत सुन्दर...
    दिल को छू गयी ..

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  7. जीवन का साद सदउपयोग करे व्यर्थ की चिन्ताओ से दूर रहे ..मित्र प्रेम का रस दुनिया में और भी है आपको बस पाना है

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  8. दिल को छू जाने वाली रचना ...

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आपका अपना
पी के ''तनहा''