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Thursday, 23 February 2012

मेरे दर्द , तुझे अपना कहूँ या पराया.........















मेरे दर्द , तुझे अपना कहूँ या पराया !

क्यों तुने ,हर पल मेरा साथ निभाया !!

सब अपने मुझसे छुट चुके थे !

वो सपने भी सब टूट चुके थे !!

जब जब खुशियों ने की बेवफाई !

याद मुझे उस पल तेरी आयी !!

तुझसे कैसा ये रिश्ता मेरा है !

तुझे शत्रु कहूँ या , कहूँ भाई !!

मैं जब जब , निकला सपने बुनकर !

कुछ ख्वाब , अधूरे से वो चुनकर !!

तब किस्मत ने मेरी मुझे छकाया !

और ज़माने ने भी खूब सताया !!

और एक तुने , मुझे ना कभी आजमाया !

मेरे दर्द , तुझे अपना कहूँ या पराया !

क्यों तुने ,हर पल मेरा साथ निभाया !!

3 comments:

  1. तुझे शत्रु कहूँ या , कहूँ भाई !!
    मेरे दर्द , तुझे अपना कहूँ या पराया !
    क्यों तुने ,हर पल मेरा साथ निभाया !!
    इस अकेलेपन में एक दर्द ही तो अपना होता.... !!

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  2. कभी खुशी भी आपका साथ यों ही निभाएगी.....

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  3. bahut hi sundar
    bhav vibhor karati rachana:-)

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पी के ''तनहा''